गाँव के आदमी बड़े बिहनिया…- CG Lockdown Shayari

गाँव के आदमी बड़े बिहनिया 
             महुआ बीने जावत हे।
शहर के आदमी लॉकडाउन म
             घुसरे घुसरे अकबकावत हे।
गाँव म मुनगा भाजी सब घर 
              आयरन ल बढ़ावत हे..
शहर म सोयाबीन बड़ी ल
             आंटी रोज डबकावत हे….

सब के धंधा लॉकडाउन हे,
               एक रुपया नई कमावत हे
एक अकेल्ला मेडिकल वाला 
                मेछा ल अंटियावत हे..||

वो गुपचुप के ठेला,
                वो समोसा वो होटल
वो डिस्पोजल वो चखना , 
                 वो भट्ठी के अद्धी बोतल
                              रहि रहि के सुरता आवत हे ,

दिक्कत नई हे गाँव म संगी
                   महुआ के धार बोहावत हे
बायलर मुर्गा फ़ोकट म बदनाम, 
              140 ले गिर के 20 रुपया दाम* 
                           तभो ले खरीदने वाला नई भेंटावत हे..

आदमी ल मारत हे कोरोना 
                 अउ मुर्गा के जिनगी बचावत हे
सही समय म वो लॉकडाउन के आर्डर , 
            सही समय म वो सील करना बॉर्डर
                     धीरे धीरे कोरोना छत्तीसगढ़ ले नंदावत हे 

    भाग भाग रे भाग कोरोना 
              छत्तीसगढ़ तोला जड़ से मिटावत हे 

                जय जोहर संगवारी हो….


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#Chutkule

Padoshan Chutkula पड़ोसन - आपकी नई बहू कैसी है ? सास - बहुत मेहनत करती है, इतनी गर्मी में भी दिन-रात लगी रहती है, कैंडी क्रश के 452 लेवल पर पहुंच गई है। व्हाट्सएप पर 25 ग्रुप चलाती है, फेसबुक पर 5 हजार फ्रेंड और 10 हजार फॉलोवर हैं। 16 ग्रुप की एडमिन है और 36 पेज चला रही है। सोच रही हूं सुबह दूध के साथ बादाम देना शरू कर दूं और तरक्की करेगी।

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